क्रिया किसे कहते हैं Kriya kise kahate hain in hindi

क्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए हिंदी में | क्रिया के भेद | की परिभाषा | प्रकार – KRIYA KISE KAHATE HAIN IN HINDI – VERB IN HINDI  

क्रिया किसे कहते हैं | क्रिया के भेद | की परिभाषा | प्रकार - kriya kise kahate hain in hindi

क्रिया किसे कहते हैं! सटीक परिभाषा – VERB IN HINDI

KRIYA KISE KAHATE HAIN>> क्रिया! वह शब्द होते है, जो कि हमें किसी WORK के करने या होने का बोध कराते हैं, ये शब्द क्रिया (KRIYA) कहलाते हैं

यानी
जिन SHABDON से किसी कार्य का करना या होना व्यक्त हो! उन्हें क्रिया (VERB) कहते हैं. जैसे ! रोया . खा रहा . जायेगा आदि.

EXAMPLE! अगर एक VAKYA ‘उसने खाना खाया’  इसमें क्रिया “खाया” शब्द है. ‘मुझे वहाँ जाना था’ में 2 KRIYA शब्द हैं – जाना और था.

जैसे कुछ उदाहरण:- पढ़ना . लिखना . खेलना . सोना . खाना . पीना आदि.

क्रिया के उदाहरण! EXAMPLES OF VERBS
  1. राम गाना गाता है.
  2. श्याम पुस्तक पढता है.
  3. चिता बहुत तेज़ दौड़ता है.
  4. सुनील खाना खाता है.
  5. हाथी जाता है.
  6. माया नाचती है.
  7. मनुष्य धीरे धीरे चलता है.
  8. पेन मेज पर पड़ा है.
  9. राम स्कूल जाता है.

ऊपर दिए गए सभी VAKYON में – गाता है. पढता है. दौड़ता है. खाता है. जाता है. नाचती है.चलता है. पड़ी हैं आदि शब्द किसी काम के होने का BODH करा रहे हैं. ये सभी KRIYA कहलाते हैं.

KRIYA के सामान्य रूपों के अंत में “ना” लगा रहता है जैसे ! आना . जाना . पाना . खोना . खेलना . कूदना आदि. SAMANYA रूपों के अंत का “ना” निकाल देने से जो बाकी बचे उसे “क्रिया की DHATU कहते हैं! आना . जाना . पाना . खोना . खेलना . कूदना क्रियाओं में आ. जा. पा . खो . खेल . कूद धातुएँ हैं. शब्दकोश में क्रिया का जो ROOP मिलता है, उसमें धातु (DHATU) के साथ ना लगा रहता है. ना हटा देने से धातु शेष रह जाती है.

क्रिया के भेद (KRIYA KE BHED)

कर्म, जाति तथा रचना के आधार (ADHAR) पर क्रिया के मुख्यतः दो भेद होते है

  • अकर्मक क्रिया!
  • सकर्मक क्रिया!
1] अकर्मक क्रिया [AKARMAK KRIYA]
वह क्रिया (KRIYA)! जिस का फल कर्ता पर ही पड़ता है! उस क्रिया को अकर्मक (AKARMAK KRIYA) कहते हैं. इस क्रिया में कर्म का अभाव होता है. जैसे राहुल पढ़ता है.इस VAKYON में पढ़ने का फल राहुल पर ही पड़ रहा है. इसलिए पढ़ता है, अकर्मक (AKARMAK KRIYA) है. जिन क्रियाओं को कर्म की जरूरत नहीं पडती या जो क्रिया PRASHN पूछने पर कोई उत्तर नहीं देती, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं.या जिन क्रियाओं का फल और व्यापर कर्ता को मिलता है, उन क्रिया को AKARMAK KRIYA कहते हैं.अकर्मक क्रिया के कुछ उदाहरण वाक्य
राम बचाता है.
राम दौड़ता है.
सांप रेंगता है.
छाया हंसती है.
मेघनाथ चिल्लाता है.

जैसा कि आप ऊपर दिए गए VAKYON में देख सकते हैं कि दौड़ता हैं. रेंगता है. हंसती है. चिल्लाता है आदि  VAKYON में कर्म का अभाव है एवं क्रिया का फल करता पर ही पड़ रहा है. ISALIYE ये सभी EXAMPLE अकर्मक क्रिया के अंतर्गत ही आयेंगे.

2] सकर्मक क्रिया (SAKARMAK KRIYA)
जिस क्रिया में कर्म का होना ज़रूरी होता है, उस क्रिया को सकर्मक क्रिया SAKARMAK KRIYA कहते हैं. इस प्रकार की KRIYAON का असर कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है. सकर्मक अर्थात कर्म के साथ.EXAMPLE – राज पानी पीता है. इसमें पीता है (KRIYA) का फल कर्ता पर ना पड़के कर्म पानी पर पड़ रहा है. अतः यह SAKARMAK KRIYA है.सकर्मक क्रिया के उदाहरण देखते हैं
राम फल खाता है.
श्याम गाड़ी चलाता है.
मैं कार चलाता हूँ.
जया सब्जी बनाती है.
रामू सामान लाता है.अपने ऊपर दिए गये वाक्यों में देखा कि KRIYA का फल कर्ता पर ना पडके कर्म पर पड़ रहा है. ISHLIYE ये सभी वाक्य सकर्मक क्रिया के UDAHARAN के अंतर्गत ही आयेगे.
सकर्मक क्रिया के भी भेद होते है
  1. एककर्मक क्रिया (EKKARMAK KRIYA)
  2. द्विकर्मक क्रिया (DWIKARMAK KRIYA)
एककर्मक क्रिया (EKKARMAK KRIYA) – जिस क्रिया में एक ही कर्म होता है; उस क्रिया को एककर्मक क्रिया (KRIYA) कहते हैं! जैसे दुर्गेश कार चलाता है. इसमें चलाता (क्रिया) का कार (कर्म) एक ही है. इसलिए यह (EKKARMAK KRIYA) के अंतर्गत आएगा.
द्विकर्मक क्रिया (DWIKARMAK KRIYA) – जिस क्रिया में दो कर्म होते हैं! उस क्रिया को (DWIKARMAK KRIYA) कहते हैं. पहला कर्म सजीव होता है एवं दूसरा कर्म निर्जीव होता है.

जैसे: राम ने सीता को फूल दिए. इस EXAMPLE में देना क्रिया के दो कर्म है सीता एवं फूल. अतः यह द्विकर्मक क्रिया का उदाहरण है.

संरचना के आधार पर क्रिया
संरचना के आधार पर क्रिया के चार भेद होता है.
प्रेरणार्थक क्रिया;
सयुंक्त क्रिया;
कृदंत क्रिया;
नामधातु क्रिया!

प्रेरणार्थक क्रिया – जिस क्रिया से यह ज्ञात होता है कि कर्ता स्वयं काम ना करके, किसी दूसरे से काम करा रहा है! जैसे – पढवाना . लिखवाना . बोलवाना आदि.
सयुंक्त क्रिया – इस क्रिया में जो किन्ही दो क्रियाओं के मिलने से बनती है, तो वह सयुंक्त क्रिया SAIYUKT KRIYA कहलाती है. जैसे – ले लिया . खा लिया . चल दिया . पी लिया . दे दिया आदि.
कृदंत क्रिया – जब किसी क्रिया में प्रत्यय जोड़कर उसका नया क्रिया ROOP बनाया जाए तो वह क्रिया कृदंत कहा है. जैसे कि दौड़ना . भागता आदि.
नामधातु क्रिया – ऐसी धातु जो क्रिया को छोड़कर किन्हीं अन्य शब्दों जैसे SANGYA , VISHESHAN , SARVANAM आदि से बनती है, वह नामधातु क्रिया कहते हैं . जैसे कि – अपनाना, गर्माना आदि.

प्रयोग की दृष्टि से क्रिया के भेद

प्रयोग की दृष्टि से क्रिया दो2 प्रकार की होती है–

1. रूढ़, और

2. यौगिक.

 

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